"पटाखे नहीं, बम फूट रहे हैं! प्रिंसिपल साहब, यह कोई दिवाली नहीं, युद्ध है! स्कूल मालिक-प्रिंसिपल, कर्मचारियों की जान की कीमत पर चुप्पी मत साधो
ऐसा प्रश्न किउ नहीं पूछे जाते?
"पटाखे नहीं, बम फूट रहे हैं! प्रिंसिपल साहब, यह कोई दिवाली नहीं, युद्ध है! स्कूल मालिक-प्रिंसिपल, कर्मचारियों की जान की कीमत पर चुप्पी मत साधो, प्रिंसिपल साहब, 'पैनिक न करें' कहकर अपनी कुर्सी बचाना बंद करो!"
युद्ध या संघर्ष जैसी बिकट परिस्थितियों में "पैनिक न करें, घर में रहें" जैसी रटी-रटाई, सामान्य नोटिस या बातें कहना न सिर्फ बेमानी है, बल्कि खतरनाक भी हो सकता है। ये कोई दिवाली के पटाखे नहीं फूट रहे, जहां थोड़ी डरावनी आवाज़ से काम चल जाए। यहां बम, गोलियां, हवाई हमले, इंटरनेट कटना, खाने-पीने की कमी, और निकलने का रास्ता बंद होना जैसी असली जानलेवा स्थिति होती है। ऐसे में सिर्फ "शांत रहो" कहकर प्रिंसिपल अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं—ये लापरवाही है, और कई मामलों में नैतिक अपराध भी।
स्कूल मालिक, स्कूल प्रिंसिपल को क्या करना चाहिए?
बात बिलकुल सही और व्यावहारिक है—बहुत सारे स्कूलों में ऑनलाइन क्लास शुरू हो गई हैं (खासकर UAE, कुवैत जैसे खाड़ी देशों में, जहां ईरान-इजराइल-US तनाव से मिसाइल अलर्ट के कारण 2-4 मार्च 2026 तक सभी स्कूल/यूनिवर्सिटी डिस्टेंस लर्निंग पर शिफ्ट हो गए हैं)। CBSE ने भी मिडिल ईस्ट के कई देशों (UAE, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब आदि) में 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाएं पोस्टपोन कर दी हैं, क्योंकि सुरक्षा स्थिति बिगड़ रही है।
लेकिन युद्धग्रस्त इलाकों (जैसे ईरान में) में फंसे भारतीय शिक्षकों/छात्रों के लिए ऑनलाइन क्लास सिर्फ एक अस्थायी बहाना नहीं बनना चाहिए। ऑनलाइन क्लास तो भारत आकर भी ली जा सकती है, जब तक सामान्य स्थिति बहाल न हो।
अपनी जवाबदेही स्वीकार करें
- नोटिस में लिखें: "हम आपकी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। कोई भी समस्या हो तो सीधे मुझे/स्कूल ऑफिस को बताएं।"
- अगर अनहोनी हुई, तो प्रिंसिपल और मालिक कानूनी रूप से जवाबदेह होंगे—ड्यूटी ऑफ केयर का उल्लंघन माना जाएगा।
- रटी-रटाई बातें बंद करें, ट्रांसपेरेंट और एक्टिव रहें।
यहां कुछ मुख्य बिंदु:
• भारत में भी खबरें हैं कि कई भारतीय छात्र / नागरिक ईरान और आस-पास के तनावपूर्ण इलाकों में हैं और उन्होंने सरकार से सुरक्षित निकासी की मांग की है — यह ख़बर वास्तविक स्रोतों में सामने आ रही है.
• कुछ छात्रों ने सोशल मीडिया/समाचार में सुरक्षा की चिंताओं और हालात की भयावहता बताई है.
• भारत के विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास ईरान में मौजूद नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहे हैं, जैसे सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना और निकासी पर काम करना.
• स्थानीय स्तर पर परिजन भी सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं.
• क्षेत्रीय तनाव (जैसे अमेरिका-इज़राइल-ईरान) के चलते फंसे लोगों की संख्या बढ़ने की ख़बरें प्रकाशित हो रही हैं.
समय पर पहल की जाए, अगर देरी हुई, तो जान-माल का नुकसान हो सकता है।
🙏 मिडिल ईस्ट में फँसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने पर सवाल क्यों नहीं पूछे जाते?
- प्रिंसिपल साहब, जब बम गिर रहे हैं और छात्र/शिक्षक रो-रोकर वीडियो भेज रहे हैं, तो "पैनिक न करें, घर में रहें" का नोटिस भेजकर आप अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहे हैं? क्या आप अपने बच्चे को ऐसी जगह छोड़कर कहेंगे?
- ऑनलाइन क्लास तो भारत लौटकर भी चल सकती है—फिर क्यों जान जोखिम में डालकर ईरान जैसे युद्धग्रस्त देश में फंसे शिक्षकों/छात्रों को वहाँ रोके रखा जा रहा है? क्या डिग्री जान से ज्यादा महत्वपूर्ण है?
- स्कूल मालिक जी, लाभ कमाने के लिए विदेश भेजा, लेकिन संकट में निकासी की व्यवस्था क्यों नहीं? क्या आपका "ड्यूटी ऑफ केयर" सिर्फ अच्छे समय के लिए है, या जान-माल की सुरक्षा भी शामिल है?
- अगर अनहोनी हो गई, तो जिम्मेदारी किसकी होगी—सरकार की, या उन स्कूलों की जिन्होंने शिक्षकों/छात्रों को जोखिम भरे इलाके में भेजा और वापस लाने में चुप्पी साध ली? क्या कानूनी कार्रवाई का डर नहीं लगता?
- क्या आप मानते हैं कि "सामान्य स्थिति" का इंतजार करते-करते जान चली जाएगी? तुरंत निकासी प्लान क्यों नहीं बनाया जा रहा, जबकि पिछले ऑपरेशन (जैसे सिंधु) में भारत ने हजारों को सुरक्षित निकाला था?
- माता-पिता से सवाल: क्या आपका बच्चा/शिक्षक वहाँ फंसा है? अगर हाँ, तो स्कूल से क्या जवाब मांग रहे हैं? चुप्पी तोड़िए, आवाज उठाइए!
महत्वपूर्ण अस्वीकरण
यह लेख युद्धग्रस्त क्षेत्रों में फंसे भारतीय शिक्षकों, छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर लेखक की गहरी चिंता और राय व्यक्त करता है। इसमें प्रिंसिपल/स्कूल मालिकों पर उठाए गए सवाल केवल नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी के संदर्भ में हैं—ये किसी कानूनी मुकदमे या व्यक्तिगत हमले का इरादा नहीं रखते। सभी विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं और किसी संगठन या संस्था के आधिकारिक नहीं। यदि आप प्रभावित हैं या कोई कार्रवाई चाहते हैं, तो कृपया MEA हेल्पलाइन, दूतावास या कानूनी मार्ग अपनाएं। लेखक किसी भी गलतफहमी या परिणाम के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। सुरक्षा पहले—यह लेख इसी भावना से लिखा गया है।
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